मैं बोला- घर वालों की बात का बुरा नहीं मानते !
उसके मुँह को अपनी ओर किया और मैं होटों पर चूमने लगा। वो बोली- जानू, यहाँ ठण्ड लग रही है, कहीं और चलते हैं। मैंने कहा- ठीक है !
हम खड़े हुए और टयूबवैल के कमरे के पास आ गये। चाबी मैं साथ लाया था। वहाँ जाकर देखा तो पहले ही कोई सोया था मैं लक्ष्मी को एक तरफ़ करके अन्दर गया और धीरे से रजाई उठाई।