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फिर बोली- चलो छोड़ो ! मैंने तो तुम्हें अपना पति मान ही रखा है। और मेरे होटों को चूम लिया, बोली- राज, आज तुम कुछ भी कर सकते हो ! मैं तैयार हूँ। मैं उसके मुँह की तरफ देखने लगा। वो बोली- क्या तुम मुझे अपनी नहीं मानते?

मानता हूँ। पर अचानक तुम्हें क्या हुआ?
मुझे कुछ नहीं हुआ ! अब पने पर काबू नहीं होता ! बस ! और एक दिन तो यह सब करना ही है तो फिर देर क्यूँ?

वो उदास थी पर मुझे दिखाने के लिए वो हँस रही थी।

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