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. . चीखने का कोई डर ही नहीं था क्योंकि वहाँ दूर-दूर तक कोई नहीं था। मैं रुका नहीं एक और झटका मारा। अब मेरा आधे से ज्यादा लण्ड अन्दर घुस गया और तीसरे झटके में पूरा लण्ड अन्दर घुस गया। वो अब भी चिल्ला रही थी- मर गई आह आ अ राज बहुत दर्द हो रहा है नि. . . निकालो इसे। और छुटने की कोशिश करने लगी। पर मेरी पकड़ के कारण वो बस थोड़ा ही हिल पा रही थी, बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी, उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।

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