उसने कोई विरोध नहीं किया और अन्दर कमरे में बिछी चटाई पर मेरे बगल में आकर बैठ गई और अपना सिर मेरे कन्धे पर टिका लिया। मैं समझ गया कि वो तैयार है और समझ गई कि मैं क्या करना चाह रहा हूँ। लेकिन मैं उसके मुँह से ही सुनना चाहता था इसलिये मैंने फिर उससे कहा- अब तैयार हो?
तो उसने कुछ नहीं कहा और शर्म से अपनी आंखे नीचे की और झुका ली।