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वह मुझे अपने ऊपर से उतारने का प्रयास करने लगी। उसकी आँखों में आँसू छलक पड़े, लेकिन मैं उसके होठों को अपने होठों में लेकर पीने लगा। थोड़ी देर ऐसे ही उसके होठों को पीता रहा और जब वो सामान्य लगी तो धीरे-धीरे धक्के मारने चालू कर दिये। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि उसके हाथ मेरी कमर पर कसने लगे हैं तो मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ानी शुरू कर दी, अब वह भी बोलने लगी कि हाय मेरे सरताज़.

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