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अब मैं निश्चिंत हो गया कि भाभी किसी से कहने वाली नहीं है वरना अब तक यहाँ इतनी आराम से बैठकर बात नहीं कर रही होती। मैंने सोचा हो सकता कि अपना कोई काम करवाना चाह रही हो, मैंने उससे खुलते हुये कहा- बताओ आपको क्या चाहिये। उसने कहा- तुम !

मेरे पैरों के नीचे से जमीन निकल गई, जी मैं? मैं आपका मतलब नहीं समझा।

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