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उसके सामने चुदवा तो नहीं सकती है। फिर मैंने कुछ सोच कर कह दिया कि मैं अपनी मोटर साईकिल यहीं खड़ी करके जा रहा हूँ वापसी मैं यहीं से होकर जाउँगा। मैं जब तक लौटा, तब तक रात के आठ बज चुके थे और अन्धेरा हो चुका था। मैंने घर के दरवाजे पर खड़े होकर कहा- नीतू, मैं मोटर साईकिल लेकर जा रहा हूँ। तो अचानक नीतू उठकर आई और मुझे अन्दर बुलाने लगी।

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