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मैंने जैसे ही उठने की कोशिश की तभी अचानक वहाँ गीतू आ गई और बोली- सर, आप नहीं जा सकते। बहुत मन्नतों के बाद तो मुझे यह मौका मिला है, मैं आपको इतनी आसानी से कैसे जाने दे सकती हूँ। एक तो मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था और दूसरी बात कि मैंने कभी गीतू को इस नजर से नहीं देखा था इसलिये इस वक्त मुझे उत्तेजना के स्थान पर गुस्सा आ रहा था।

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