उसने काले रंग की ब्रा और पैन्टी पह्नी थी, क्या कयामत लग रही थी !
न चाहते हुए भी मेरी नजर उससे नहीं हट रही थी। उसकी चूचियों और गाण्ड को देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। बारिश के साथ हवा भी चलने लगी जिससे साईकल आगे ही नहीं बढ़ रही थी। वो सड़क के पास बने एक कमर की तरफ इशारा करके बोली- यहाँ रुकते हैं। मैंने हाँ कर दी।