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कमीज़-सलवार फिटिंग में थे जिससे उसकी चूची और गाण्ड के उभार साफ दिख रहे थे। उसे देखते ही मेरा लण्ड फिर सलामी देने लगा। मैं उसे देखकर मुस्कुराया। यहाँ क्यूँ बैठे हो? उसने मुस्कराते हुए पूछा। उसका मुस्कराना मुझ पर बिजली सी डाल गया- आपका इन्तजार कर रहा था। तुम्हें क्या पता था कि मैं आऊंगी?

मुझे विश्वास था कि तुम जरूर आओगी।

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