”
अब तो मेरी ख़ुशी के ठिकाने नहीं थे . . . क्योंकि अभी भी उन्होंने सिर्फ पेटीकोट पहना था। लेटते ही उन्होंने उन. . . . . आईई करना शुरू कर दिया। मैंने पूछा- आपको क्या हुआ है?
तो उन्होंने कहा,” बेटा, मैं भीग गई थी न इसलिए कमर में दर्द है। तू ऐसा कर मेरे बैग से मूव निकाल कर मेरी पीठ पर लगा दे. . . . मैंने जैसे ही लगाना शुरू किया वो अपने पेटीकोट का नाड़ा ढीला करते हुए बोली,” बाप रे ! मर गई रे ! सुबह से पेट इतना दबा है”
और नाड़ा खोल दिया।