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. . मैंने अपनी दो ऊँगलियाँ अन्दर डाली तो देखा कि दो क्या पूरा हाथ डाल सकते हैं और फिर अंगूठा छोड़कर चारों ऊँगलियाँ अन्दर घुसानी शुरू कर दी और बड़बड़ाने लगा,”पारुल जान, यह इतनी बड़ी कैसे है?”

उन्होंने कहा,”बेटा इसी से तो तेरी दो मोटी मोटी बहनें निकली हैं। तो क्या बड़ी नहीं होगी? अब देर मत कर जल्दी अन्दर सरका दे .

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