. . . . . . ”
और कहा,” धीरे धीरे चोदो बेटा, मंहगाई का ज़माना है, इस २ इंच की चूत को जिंदगी भर चलाना है !”
कुछ ही देर में चाची ने बाहर निकाल दिया और कहा,”तू नीचे लेट जा. . . . ”
और पहले पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। अब मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर हल्के से ही चूत के मुँह पर स्पर्श किया था कि तुरंत अन्दर प्रवेश कर गया।