मेरा सारा
ढयन उन्ही पर था. भाभी ने अंडरवेर के उपेर से ही भैसाहब का
लॅंड सहलाना शुरू कर दिया था. बहासाहब ने अचानक उन्हे गोड मे
उठाया ओर रूम से बाहर चले गये. मई समझ गया शायद बातरूम
मे ही गये होंगे. मान तो बहुत था फिर भी मई बाहर नही निकला ओर
सोफे पर वापस लेट गया. पर नींद नही आई. थोड़ी देर के बाद मुझे
उनकी आहत फिर से सुनाई दी तो मई फिर खीरकी पर जाम गया.