पर मे इग्नोर करता रहता था. लकिन अब मुझे भी मज़ा आने लगा था. स्कूल मे दोस्तो के साथ भी
ऐसी ही बातें होती रहती थी. पर मेने उन्हे कभी भाभी के बारे मे
नही बताया. हाँ अब मे लॅंड-छूट का फ़र्क समझने लगा था पर मे
इनका उसे नही जनता था. बस सेक्स की नालेज आती जेया रही थी. मेरा लॅंड अब अक्सर टाइट हो जाता था. ओर मे इसका मतलब समझ नही
पता था.