थोड़ी
देर तुम्हारे यहाँ टाइम-पास किया जाए. चलो खाना बाद मे खाएँगे
अभी भूक भी नही है तुम्हारे घर चल कर ग़मे खेलते हैं. ओर
आप मुझे कुछ बताने वाली थी- मैने कहा. क्या? वो बोली. मई
शरमाया- मेरा आपकी उसमे कैसे जाएगा? वो हसी, बोली सबर करो वो
सब रत को, दिन मे भूल जया करो चलो तुम्हारे घर चलते हैं. अब मई क्या कह सकता था.