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उन्होने कपड़े बदलने के लिए अपनी मेक्शी
उतरी, नीचे वो ब्लाउस ओर पेटीकोत पहने हुए थी. मई समझा वो भी
उतरेंगी. पर उन्होने मुस्कुराते हुए एक सारी लपेटनी शुरू कर दी. फिर हम लोग मेरे घर गये. वहाँ वो मों से बातें करती रही ओर मई
आसपास इसलिए लगा रहा की कहीं वो मेरी शिकायत ना कर दे, कितना
भोला था मई. पर फिर भी एक बार तो मेरी हवा खराब हो ही गयी
जब मों बोली- “रूपी” तुमने तो हुमारे लड़के पर जादू सा कर दिया
है, जब देखो भाभी-भाभी ही करता रहता है.

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