मैं संकोच के मारे
उनलोगो से कम बातें करता था लेकिन
भाई मुज़से काफ़ी हँसी मज़ाक करते थे. शाम को भाई ने भाभी से कहा हम
बाजार होकर आते हैं तुम खाना मत
बनाना, होटेल से मँगवा लेना क्योंकि हमारे छोटे भाई की खातिरदारी तो करनी
पड़ेगी और वैसे भी मुझे15-20 दीनो
के लिए सोमवार की फ्लाइट से चेन्नई जाना हैं. भाभी ने कहा ठीक है आप
लोग 8 बजे टके आ जाना तब तक
होटेल से खाना भी आ जाएगा.