भाभी उठकर पपद
और 3 ग्लास ले आई. 3 ग्लास देखते ही मैं चौका लेकिन कुच्छ नहीं कहा. अचानक भाई ने मुज़से कहा “संजय
केया तुम लायटे हो ?
मैं: तोड़ा संकोच करते हुए कहा, हन कभी कभी मैं ले लेता हूँ
भाई: कितनी लेते हो (यह सुनते ही भाभी हंस पड़ी)
मैं: अगर दूसरे दिन च्छुटी हो तो 3-4 पेग ले लेता हूँ. भाई: फिर तो ठीक हैं कल रविवार हैं और तुमाहरी च्छुटी भी है.