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फिर
भी मई किसी तरह यह सब गंदी बातें दिमाग़
से हटा कर सो गया. कब्रिब रात 1:30 बजे मेरी नींद खुली और मूज़े
ज़ोर से पेशाब लगी. मैं दीवार की तरफ था
और उतार ने की लिए भाभी के उपर से लाँघना पड़ता था. मैं उठा और
भाभी को लाँघने के लिए उनके पैरो पर हाथ
रखा. हाथ रखते ही मेरे सारे बदन मे करेंट सा लग गया. भाभी की
सारी घुटनो के उप्पर थी और मेरा हाथ उनकी
नंगी जाँघो पर पड़ा था लेकिन भाभी की तरफ से कोई आहत नहीं हुई.

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