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मैने अपना हाथ नीचे सरकया तो मूज़े
उनकी नर्म नरम गड्राई जाँघो का स्पर्श हुवा. तभी मेरा स्पर्श पाकर भाभी ने थोड़ी हलचल की फिर शांत
हो गयी. मैं वहीं थोड़ी देर रुक कर अपना हाथ
उपर सरकने लगा जिस से उनकी सारी भी उपर सरक रही थी. भाभी फिर से कुछ हिली तोड़ा कुन्मुनाई
पर शांत हो गयी. अब मेरा मान मेरे बस मे नहीं था मैने
अपना हाथ भाभी के जाँघो के बीच लेने की
सोची पर मैने पाया की भाभी की जंघे आपस मे सती हुई थी
और मेरी उंगलियाँ उनकी छूट तक नहीं पहुँच
सकती थी.

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