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हाथों की उंगलियाँ लंबी लंबी मुलायम सी. देख देख कर लंड महाराज खरे ही हो गये. मान में ज़ोरों से ख़याल आ रहा था , क्या ग़ज़ब की अप्सरा है. इसकी तो छूट को हाथ लगते ही शायद हाथ जल जाएगा. तभी वो बोली, “अक्चा, थॅंक्स फॉर एवेरितिंग. मैं चलती हून. ” मानो पहाड़ टूट गया मेरे उपर. चली जाएगी तो हाथ से निकल ही जाएगी.

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