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एक बार रात को तो मैंने सपने में भी उनके साथ अपनी छातियां दबवा ली थी और यह सपना जल्दी ही वास्तविकता में बदल गया। तीसरी रात को मैं वासना से भरे ख्यालात में डूबी हुई थी। बाहर बरसात हो रही थी, मैं कमरे से बाहर गेलरी में आ गई। तभी बिजली गुल हो गई। बरसात के दिनो में लाईट जाना यहाँ आम बात है। मैं सम्भल कर चलने लगी।

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