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एक सिहरन सी दौर गयी उसके शरीर में. बंद आँखों से ही बोली, “प्लीज़ विजय साहब, जल्दी से ! कोई आ नहीं जाए. ” “घबरयो नहीं, प्रतिमा डार्लिंग. बस मज़ा लेती रहो. आज मैं तुम्हे दिखला दूँगा प्यार किसे कहते हैं. खूब छोड़ूँगा मेरी रानी. ” मैं एकद्ूम फॉर्म में था. यह कहते हुए मैने उसकी चुचियों हो खूब दबाया और होठों को कस कस कर चूसने लगा.

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