About:

फिर मैने उसकी चुचियों को खूब चूसा और उंगलियों से उसकी बर में खूब अंदर बाहर कर हिलाया. “प्रतिमा, अब मैं नहीं रह सकता, अब तो छोड़ना ही पड़ेगा. कस कस कर छोड़ूँगा मेरी रानी. ” पहली बार उसके मूह से अब सुना, “छोड़ दीजिए ना विजय साहब, बस छोड़ दीजिए. ” मज़ा लेते हुए मैने पूछा, “क्या छोड़ूँ जाने मान. एक बार फिर से कहो ना.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*