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और फिर हुँने कस कस कर चुदाई की. और इस बार झरने में काफ़ी समय भी लगा. मैने शायद उसकी चुचियाँ और बर और होत और गाल के किसी भी अंग को चूसे बगैर नहीं छोरा. इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था. बस ग़ज़ब की चीज़ थी वो. कपड़े पहनने के बाद मैने उसे 500 रुपये दिए जो की उसने ना ना करते हुए शरमाते हुए ले लिए. और मैने पूछा, “प्रातीं, अब तो तुम्हे और कई बार छोड़ना पड़ेगा.

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