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देख गालियां जब हम होश में हो, तब देना या बोलना गुनाह है। मगर, जब हम उत्तेजीत होते है और बहुत जोश में होते है तो अपने आप ये सब मुंह से निकल जाता है, तु भी कर के देख। ”

मैने बात टालने की गरज से कहा,
“ठीक है मैं कोशिश करुन्गा, पर अभी मैं इतने जोश में नही हुं कि, गालियां निकाल सकुं। ”

“हां, बीच में रोक कर तो तुने सारा मजा खराब कर दिया, देख मैं तुझे बतलाती हुं, गालियां और गंदी गंदी बातें भी अपने आप में उत्तेजना बढाने वाली चीज है, चुदाई के वक्त इसका एक अलग ही आनंद है।

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