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पता नही मां को पता था या नही पर मुझे बडा मजा आ रहा था। मैने जब भी किसी के घर से कपडे ले कर वापस लौटता तो मां बोलती,
“क्यों, रधिया के कपडे भी लाया है धोने के लिये, क्या ?”

तो मैं बोलता, “हां । “,

इस पर वो बोलती,
“ठीक है, तु धोना उसके कपडे बडा गन्दा करती है। उसकी सलवार तो मुझसे धोई नही जाती। ”

फिर् पुछती थी,
“अंदर के कपडे भी धोने के लिये दिये है, क्या ?”

अंदर के कपडो से उसका मतलब पेन्टी और ब्रा या फिर अंगिया से होता था।

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