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फिर पहले पैर को मोडे कर, दुसरे पैर को फैला कर साबुन लगाती। पुरा अंदर तक साबुन लगाने के लिये, वो अपने घुटने मोडे रखती और अपने बांये हाथ से अपने पेटिकोट को थोडा उठा के, या अलग कर के दाहिने हाथ को अंदर डाल के साबुन लगाती। मैं चुंकि थोडी दुर पर उसके बगल में बैठा होता, इसलिये मुझे पेटिकोट के अंदर का नजारा तो नही मिलता था।

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