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सुबह सुरज की पहली किरण के साथ जब मेरी नींद खुली तो देखा, एक तरफ बापु अभी भी लुढका हुआ है, और मां शायद पहले ही उठ कर जा चुकी थी। मैं भी जल्दी से नीचे पहुंचा तो देखा की मां बाथरुम से आ के हेन्डपम्प पर अपने हाथ-पैर धो रही थी। मुझे देखते ही बोली,
“चल, जल्दी से तैयार हो जा, मैं खाना बना लेती हुं। फिर जल्दी से नदी पर नीकल जायेन्गे, तेरे बापु को भी आज शहर जाना है बीज लाने, मैं उसको भी उठा देती हुं।

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