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“क्या करुं ? अब हंसने पर भी कोइ रोक है, क्या ?”

“नही, मैं तो ऐसे ही पुछा रहा था। नही बताना है तो मत बताओ। ”

“अरे, इतनी अच्छी ठंडी हवा बह रही है, चेहरे पर तो मुस्कान आयेगी ही। ”

“हां, आज गरम ईस्त्री (वुमन) की सारी गरमी जो निकल जायेगी। ”

“क्या मतलब, ईस्त्री (आयरन) की गरमी कैसे निकल जायेगी ? यहां पर तो कहीं ईस्त्री नही है।

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