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मेरी हालत एकदम खराब हो रही थी। गुदगुदाहत और सनसनी के मारे मेरे मुंह से कोई आवाज नही निकल पा रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे कि, मेरा पानी अब निकला की तब निकला। पर मां को मैं रोक भी नही पा रहा था। मैने सिसयाते हुए कहा,
“ओह मां, हाये निकल जायेगा, मेरा निकल जायेगा। ”

इस पर मां और जोर से हाथ चलाते हुए अपनी नजर उपर करके, मेरी तरफ देखते हुए बोली,
“क्या निकल जायेगा ?”

“ओह, ओह, छोडोना, तुम जानती हो, क्या निकल जायेगा,,,? क्यों परेशान कर रही हो ?”

“मैं कहां परेशान कर रही हुं ? तु खुद परेशान हो रहा है।

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