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तभी मेरे कंधों पर दो हाथ आकर जम गये। मैं ठिठक कर मूर्तिवत खड़ी रह गई। उसके हाथ नीचे आये औरबगल में आकर मेरी चूचियों की ओर बढ़ गये। मेरे जिस्म में जैसे बिजलियाँ कौंध गई। उसके हाथ मेरे स्तन पर आ गये। “क्…क्…कौन ?”

“श्…श्… चुप …। ”

उसके हाथ मेरे स्तनों को एक साथ सहलाने लगे। मेरे शरीर में तरंगें छूटने लगी।

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