सुबह-शाम दिनभर में चार-पांच बार। कभी ज्यादा पानी पी लिया तो ज्यादा बार हो जाता है। ”
“हाये, दिनभर में चार-पांच बार ? और पानी पीने से तेरा ज्यादा बार निकलता है ? कही तु पेशाब करने की बात तो नही कर रहा ?”
“हां मां, वही तो मैं तो दिनभर में चार-पांच बार पेशाब करने जाता हुं। ”
इस पर मां ने मेरे लंड को छोड कर, हल्के-से मेरे गाल पर एक झापड लगाई और बोली,
“उल्लु का उल्लु ही रह गया, क्या तु ?”
फिर बोली
“ठहर जा, अभी तुझे दिखाती हुं, माल कैसे निकल जाता है ?”
फिर वो अपने हाथों को तेजी से मेरे लंड पर चलाने लगी।