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तभी मेरी तन्द्रा जैसे टूट गई। मेरे हाथों में उसके सर बाल की जगह मेरी झांटें थी। मैंने जल्दी से इधर उधर देखा, ओह कैसा अनुभव था ! मैं अपने पर मुस्करा उठी और आश्वस्त हो कर बैठ गई। चूत में मची हलचल के कारण मेरा शरीर बल सा खाने लगा। मेरी झांटें मेरे चूत के रस से गीली हो गई थी। मैंने अपने उरोजों पर नजर डाली और उसकी घुण्डियों को मल दिया।

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