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तभी मां पेशाब कर के उठ खडी हुई और मेरी तरफ घुम गई। उसने अभी तक साडी को अपनी झांघो तक उठा रखा था। मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए, उसने अपनी साडी को छोड दिया और नीचे गीरने दिया। फिर एक हाथ को अपनी चुत पर साडी के उपर से ले जा के रगडने लगी, जैसे कि पेशाब पोंछ रही हो, और बोली,
“चल, तु भी पेशाब कर ले, खडा-खडा मुंह क्या ताक रहा है ?”

मैं जो की अभी तक इस सुंदर नजारे में खोया हुआ था, थोडा-सा चौंक गया।

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