मां ने फिर कुरेदते हुए पुछा,
“क्यों, क्या बात है, थक गया है क्या ?”
मैने कहा,
“नही मां, ऐसी कोई बात तो है नही। बस ऐसे ही पिछे चल रह हुं। ”
तभी मां ने अपनी चाल धीमी कर दी, और अब वो मेरे साथ-साथ चल रही थी। मेरी ओर अपनी तिरछी नजरों से देखते हुए बोली,
“मैं भी अब तेरे को थोडा बहुत समझ्ने लगी हुं। तु कहां अपनी नजरें गडाये हुए है, ये मेरी समझ में आ रह है।