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मां मेरी तडप का मजा लेते हुए बोली,
“उम्मीद पर तो दुनिया कायम है। जब इतनी देर तक इन्तेजार किया तो, थोडा और कर ले। आराम से खाना, अपने बाप की तरह जल्दी क्यों करता है ?”

मैं ने तब तक खाना खतम कर लिया था, और उठ कर लुंगी में हाथ पोंछ कर, रसोई से बाहर निकाल गया। मां ने भी खाना खतम कर लिया था। मैं ईस्त्री वाले कमरे आ गया, और देखा कि अंगीठी पुरी लाल हो चुकी है।

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