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कुल मिला कर हम बहुत सुखी-संपन्न थे। और कीसी चीज की दिक्कत नही थी। मेरे से पहले कपडे साफ करने में, मां का हाथ मेरी बहन बटाती थी। मगर अब मैं ये काम करता था। हम दोनो मां-बेटे हर हफ्ते में दो बार नदी पर जाते थे और सफाई करते थे। फिर घर आकर उन कपडो की ईस्त्री कर के, उन्हे गांव में वापस लौटा कर, फिर से पुराने, गन्दे कपडे इखट्टे कर लेते थे।

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