About:

पर उस वक्त मुझे इन बातो का कम ही ग्यान था। फिर भी थोडा बहुत तो गांव के लडको के साथ रहने के कारण पता चल ही गया था। और जब भी मैं और मां कपडे धोने जाते तो मैं बडी खुशी के साथ कपडे धोने उसके साथ जाता था। जब मां, कपडे को नदी के किनारे धोने के लिये बैठती थी, तब वो अपनी साडी और पेटिकोट को घुटनो तक उपर उठा लेती थी और फिर पिछे एक पत्थर पर बैठ कर आराम से दोनो टांगे फैला कर जैसा की औरते पेशाब करते वक्त करति है, कपडो को साफ करती थी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*