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. . ओह्ह्ह हां हां और ज़ोर से . . . ओह्ह्ह ले लो मेरी गांड आज. ”

जय के शरीर मे उबाल आ राहा था और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. आखिर उसने ज़ोर का धक्का मार अपना वीर्य अपनी बैहन की गांड में छोड दिया, जय तब तक धक्के मारता गया जब तक की उसके अन्डकोशों ने वीर्य की एक एक बून्द ना उगल दी. फिर दोनो थक कर अलग हो गये और फिर एक दूसरे को चूमा.

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