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उनके व्यवहार के आगे मै कर भी क्या सकती थी?” रिया ने अपने आँसुओं को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन वो रोक ना पायी. अब भी दिल के किसी कोने से वो अपनी मा को प्यार करती थी, लेकिन फिर भी जो कुछ हुआ उसके लिये वो अपनी मा को कभी माफ़ नही कर सकती थी, “आखिर तुम उन्हे रोकने की कोशिश तो कर सकती थी. ” जब रिया घूम कर अल्मारी से अपने और जय के कपडे निकाल कर बिस्तर पर रखने लगी तो उनकी मा वाहां से चली गयी.

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