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पर समाज और दुनिया के बीच रैहकर उसकी रक्शा करना उसका खयाल रखना, ये सब वो कैसे करे उसकी समझ मे नही आ राहा था. “राज”. राज ने कुछ काहा नही बल्की अपने चैहरे को उसके चैहरे से सटा दिया. रोमा को जब राज के रोने का एह्सास हुआ तो वो समझ गयी और उसने अपनी बाहों को खोल उसे अपनी बाहों मे बान्ध लिया. उसकी आँखों से बैहते आँसुओं को उसने चूम लिया.

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