मैं उसकी बेरुखी पर तड़प उठी। सारी छुट्टियाँ अब क्या मुझे सपनों में जीना होगा। उह ! यहाँ तो कोई चोदने वाला भी नहीं मिलता। छुट्टियों में शहर से सभी लड़के अपने अपने घर चले गये थे … कौन था भला मुझे चोदने वाला …
किससे अपनी चूत की प्यास बुझाऊँ…? मुझे लगा कि अब यहाँ से जल्दी ही प्रस्थान करना चाहिये। कब तक भला अकेली ही पड़ी विचारों का मैथुन करती रहूँ, मुझे तो सख्त लौड़े की आवश्यकता थी जो चूत के या गाण्ड के भीतर तक जाकर मेरी यौन क्षुधा तृप्त कर सके !
मेरी यह कहानी, मात्र कहानी ही है।