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. . ”

“आशू जी, आप तो अपने कपड़े उतारो . . . कविता आपका स्वागत करेगी. . . कविता कुछ तो कहो !”

“जी मैं क्या कहूँ. . . मुझे तो बहुत लज्जा आ रही है. . . ” कविता ने मुँह छुपा रखा था। आशू कविता के और नजदीक आ गया था। ” आपके मुख के पास कुछ है. . . कविता जी. . . मुख खोलो तो. . . ” आशू ने कहा। कविता ने अपना मुख खोल दिया.

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