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मैं मन ही मन मुस्कुरा उठी. जैसा मैं चाह रही थी वैसा ही हुआ. संजय अपने होश खो बैठा. वो उठा और मेरे पास बिस्तर पर बैठ गया. मैं जान गयी थी की उसके इरादे अब नेक हो गए है. मैंने अपनी टांगे और फैला ली . . . और किताब के पन्ने पलटने लगी. संजय ने मेरे पूरे बदन को देखा और फिर अचानक ही . . . . . . वो बिस्तर पर आ गया और मेरी पीठ पर सवार हो गया.

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