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आशू को लगा जैसे कि कविता की चूत ढीली पड़ गई थी, उसमें पानी भरा हुआ था और लण्ड अब फ़च फ़च की आवाज कर रहा था। तभी रूपा ने अपने आप को आशू के सामने पेश कर दिया. . . “उसका काम तो हो गया, आशू जी, मेरी ओर तो देखो, यहाँ तो आपको फिर से बेकरार एक चूत मिलेगी. . . उठो और मेरे से चिपक जाओ !” रूपा ने आशू को अपनी ओर खींचा।

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