. . ”
मेरी मतवाली रूपा यही है वो मस्त चीज़ जो हमे अभी मस्ती देगी . . . अब बनो मत . . . ”
“ना जी . . . मत सताओ . . . इसे दूर ही रखो . . . मेरा मन डोल रहा है. . . हाय रे ! क्या कर रहे हो. . . घुसाये चले जा रहे हो. . . आह्ह्ह मेरे राजेश. . . !!”
“मस्ती आ रही है ना. . . आओ अब अधरों का रसपान करें” राजेश भी भावना में बह कर बोला।