दोनों के होंठो की पत्तियां टकरा गई और एक दूसरे की जीभ से वो भीग गये। होंठो का कसाव दोनों ने बढ़ा दिया और अधरपान में लीन हो गये। राजेश के मुँह से सीत्कार निकल पड़ी. . . रूपा ने उसका लण्ड कस कर दबा दिया था। “अरे रूपा, तुम मुझे मार डालोगी. . . जरा धीरे से. . . कहीं निकल गया तो मजा नहीं आयेगा. . . ”
“तो फिर जी, क्या करें .