कदमों की आहट उसके पलंग के पास आकर रुक गई। मौसा जी ने धीरे से गाऊन और ऊपर खिसका दिया। कविता के चूतड नंगे हो गये, कविता ने अपनी आंखे बंद किये हुये कहा,”आओ रूपा मौसी, नींद नहीं आ रही है क्या?”
दूसरी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया। दो हाथ कविता की जांघ सहलाने लगे थे। “मौसी क्या कर रही हो ! हाय ! मत करो ना .